बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की उम्र को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड और वोटर आईडी में दर्ज जन्मतिथि को उम्र का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
उम्र तय करने के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड की 10वीं की मार्कशीट, स्कूल रिकॉर्ड और जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने बलरामपुर जिले की कृष्णानगर ग्राम पंचायत की सरपंच जसिला तिथियो का चुनाव रद्द करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है।
19 साल की उम्र में दाखिल किया था नामांकन
मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की जनपद पंचायत बलरामपुर की ग्राम पंचायत कृष्णानगर का है। यहां 22 फरवरी 2025 को सरपंच पद के लिए मतदान हुआ था। तीन उम्मीदवार मैदान में थे और जसिला तिथियो को सबसे ज्यादा वैध वोट मिले थे। उनका नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वीकार कर लिया था।
इसके बाद प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सूरजपती राम ने चुनाव याचिका दायर कर जसिला की उम्र पर सवाल उठाया। याचिका में कहा गया कि जसिला की वास्तविक जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 है। ऐसे में नामांकन के समय उनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी।
चुनाव के बाद बदली जन्मतिथि का रिकॉर्ड
चुनाव याचिका पर सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 सामने आई। बाद में जसिला ने 5 जुलाई 2025 को अपडेट कराया गया जन्म प्रमाणपत्र पेश किया, जिसमें जन्मतिथि 12 अप्रैल 2002 दर्ज थी। हाईकोर्ट ने इसे इसलिए निर्णायक नहीं माना, क्योंकि यह प्रमाणपत्र चुनाव याचिका दायर होने के बाद जारी हुआ था।
संविधान में 21 साल की उम्र जरूरी
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 7 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि पंचायत चुनाव लड़ने के लिए संविधान के अनुच्छेद 243-एफ के तहत 21 वर्ष की उम्र पूरी होना जरूरी है। कोर्ट ने जन्मतिथि तय करने के लिए स्कूल रिकॉर्ड और मान्यता प्राप्त बोर्ड के मैट्रिक प्रमाणपत्र को महत्वपूर्ण माना।
हाईकोर्ट ने चुनाव ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें जसिला का निर्वाचन शून्य घोषित किया गया था। कोर्ट ने उनकी रिट याचिका भी खारिज कर दी।








