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NDPS एक्ट प्रकरणों की विवेचना को सुदृढ़ बनाने हेतु रायपुर कमिश्नरेट में पुलिस अधिकारियों हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

➡️ पुलिस कमिश्नर रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश मान श्री बलराम प्रसाद वर्मा की गरिमामय उपस्थिति में हुआ कार्यशाला का उद्घाटन

➡️ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मान श्री पंकज सिन्हा एवं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मान श्री शैलेश शर्मा द्वारा विषय विशेषज्ञ के रूप में सभी पुलिस अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण, एवं विवेचना की बारीकियों से कराया गया अवगत

➡️ रायपुर पुलिस के 125 विवेचकों/पुलिस अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण सत्र में भाग एवं विवेचना में हो रही प्रक्रियात्मक त्रुटियों से हुए अवगत

➡️ कमिश्नरेटर रायपुर पुलिस द्वारा सर्किट हाउस के कन्वेंशन हॉल में आज दिनांक 29/03/2026 को NDPS प्रकरणों की विवेचना से संबंधित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को NDPS मामलों की बारीकियों से अवगत कराना तथा दोष सिद्धि दर बढ़ाने हेतु आवश्यक सावधानियों पर मार्गदर्शन प्रदान करना था।
कार्यशाला में पुलिस कमिश्नरेट रायपुर एवं रायपुर ग्रामीण जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी तथा विवेचक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में न्यायपालिका एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बलराम वर्मा, माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री पंकज सिन्हा, माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री शैलेश शर्मा तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आनंद सिंह उपस्थित रहे। पुलिस विभाग से पुलिस कमिश्नर डॉ संजीव शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर श्री अमित तुकाराम कांबले, पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) श्री मयंक गुर्जर एवं पुलिस उपायुक्त (पश्चिम जोन) श्री संदीप पटेल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ संजीव शुक्ला ने युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता व्यक्त की तथा इसे एक खतरनाक सामाजिक प्रवृत्ति बताया। उन्होंने विवेचक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि NDPS प्रकरणों में गुणवत्तापूर्ण विवेचना एवं सुदृढ़ साक्ष्य संकलन के माध्यम से दोष सिद्धि दर बढ़ाई जा सकती है, जिससे नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बलराम वर्मा ने अपने उद्दबोधन में थानों को “प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र” की संज्ञा देते हुए कहा कि अपराध पंजीबद्ध होना ही उसके उपचार की शुरुआत है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों की निष्पक्ष एवं संवेदनशील भूमिका पर जोर दिया तथा समाज में न्याय सुनिश्चित करने हेतु बिना किसी भेदभाव के कार्य करने की आवश्यकता बताई।
उद्दघाटन सत्र के पश्चात कार्यशाला में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री शैलेश शर्मा द्वारा NDPS अधिनियम के प्रक्रियात्मक पहलुओं का विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने विवेचना के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उनके सुधार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
इसके उपरांत माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री पंकज सिन्हा द्वारा NDPS अधिनियम से संबंधित विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों एवं प्रकरणों के उदाहरण प्रस्तुत किए गए। उन्होंने बताया कि किन सावधानियों का पालन कर विवेचना को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा दोष सिद्धि की संभावना को बढ़ाया जा सकता है।
कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित अधिकारियों ने अपने संदेहों का समाधान प्राप्त किया। इस संवादात्मक सत्र के माध्यम से विवेचना से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं का निराकरण किया गया।

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