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फिर फिसला गोल्ड-सिल्वर, जानिए क्या है वो तीन कारण जिसके चलते ढहा सोने का किला

गुरुवार, 9 अप्रैल को कमोडिटी मार्केट में सोना और चांदी दोनों दबाव में दिखे। मल्टी एक्सटेंड कमोडिटी ( MCX) पर चांदी करीब 2% गिरकर ₹2,35,133 प्रति किलो पर आ गई, जबकि सोना 0.7% यानी ₹1,129 की गिरावट के बाद ₹2,39,918 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इंटरनेशनल मार्केट में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 73.83 डॉलर प्रति औंस पर फिसला, जबकि सोना 4,715 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर, लेकिन दबाव में रहा।

सोना-चांदी के भाव गिरने की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। इजरायल के लेबनान में हमले और ईरान की चेतावनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर की आशंका बनी हुई है।

ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों $97 प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहे हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं। इससे बिना ब्याज वाले निवेश, जैसे सोना और चांदी, दबाव में आते हैं।

इसके अलावा मजबूत डॉलर और फेडरल रिजर्व के संकेत भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहे हैं। डॉलर मजबूत होने से सोना-चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग कम होती है। अगर महंगाई ज्यादा रहती है तो ब्याज दरें बढ़ सकती हैं या कटौती टल सकती है, जो बाजार को प्रभावित करता है।

बाजार अब अमेरिकी महंगाई (PCE) और जॉब्लेस क्लेम्स डेटा पर टिका है। ये आंकड़े तय करेंगे कि फेड की नीति क्या रहेगी और सोना-चांदी का रुख किस दिशा में जाएगा।

हालिया परिस्थितियों में बाजार पूरी तरह खबरों पर आधारित है। इसलिए बड़े निवेश से बचना बेहतर माना जा रहा है। धीरे-धीरे और सतर्क निवेश करना समझदारी है। खासकर चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, इसलिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

ऑगमोंट में रिसर्च हेड, रेनीशा चैनानी के अनुसार तकनीकी स्तर अभी भी पॉजिटिव संकेत दे रहे हैं। चांदी $76.5 के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट दे सकती है, जहां से $82–$87 तक जाने की संभावना है। वहीं, सोना $4,800 के ऊपर टिकता है तो $5,000 तक तेजी दिखा सकता है।

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