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फैंस बेशुमार-प्रदर्शन बेकार, खराब योजना और कमजोर जमीनी स्तर के कारण FIFA World Cup से दूर होता भारत

भारत में हर चार साल के अंदर एक चर्चा खूब जोर पकड़ती है। वो चर्चा फुटबॉल में टीम इंडिया का फीफी वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई न करने को लेकर होती है। भारत के हर फुटबॉल प्रेमी के मन में एक ही सवाल पैदा होता है और सवाल ‘आखिर हम क्यों वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं बनते’ होता है।

आज यानी 11 जून से फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत हो रही है। जिसका भारतीय फैंस 12 जून की सुबह से आनंद ले सकते हैं। इसी कड़ी में भारत के फुटबॉल प्रेमी फुटबॉल का आनंद तो लेंगे, लेकिन उनके मन में एक खटास तो अपनी टीम को फुटबॉल के इस सबसे बड़े मंच पर न देख पाना भी होगी।

भारत के फुटबॉल के 30 करोड़ से ज्यादा दर्शक

फीफा विश्व कप 2026 के कई भारतीय फैंस रातों में जागकर इसका आनंद लेने को तैयार हैं। इस दौरान वो क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी के बाद फ्यूचर स्टार के बारे में चर्चा करते हुए सपने देखेंगे। KMG की 2025 की रिपोर्ट की मानें तो हिंदुस्तान में इस वक्त फुटबॉल के दर्शकों की संख्या 30 करोड़ से ज्यादा है। इन्हीं 30 करोड़ हिंदुस्तानियों के सामने इस बार के विश्व कप में भी सबसे बड़ा सवाल उत्पन्न होगा कि भारत क्यों इतने बड़े मंच पर नहीं दिखाई देता?

भारत फुटबॉल में पीछे क्यों?

भारतीय फुटबॉल टीम की इस वक्त दुनिया में 139वीं रैंकिंग है। 140 करोड़ के आसपास की जनसंख्या वाले इस देश का दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल में इतना पीछे होना वाकई परेशान करने वाली बात है। भारत में पिछले कुछ सालों से आईपीएल की तर्ज पर इंडियन सुपर लीग का आयोजन किया जा रहा है। बावजूद इसके भारतीय फुटबॉल इस वक्त कई अनिश्चित्ताओं से जूझ रहा है।

भारतीय फुटबॉल की मौजूदा स्थिति के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। घरेलू लीगों में स्थिरता की कमी, क्लबों द्वारा जमीनी स्तर के ढांचे में सीमित निवेश और प्रतिभा विकास की कमजोर व्यवस्था सबसे बड़ी समस्याएं हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में दर्शक विदेशी लीगों और क्लबों का समर्थन करते हैं, जबकि भारतीय फुटबॉल को अपेक्षाकृत कम महत्व मिलता है।

भारत में फुटबॉल के करोड़ों प्रशंसक हैं और फीफा विश्व कप से लेकर यूरोपीय क्लब फुटबॉल तक का जबरदस्त क्रेज देखने को मिलता है। इसके बावजूद देश में घरेलू फुटबॉल को वह समर्थन नहीं मिल पा रहा है, जिसकी उसे जरूरत है। यही वजह है कि भारतीय फुटबॉल लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है।

मीडिया समर्थन की कमी

क्रिकेट की तुलना में फुटबॉल को प्रायोजकों और मीडिया का काफी कम समर्थन मिलता है। इसका असर घरेलू प्रतियोगिताओं पर भी साफ दिखाई देता है। देश की प्रमुख लीग इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) भी पिछले कुछ समय से अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। पर्याप्त निवेश और मजबूत व्यावसायिक मॉडल के अभाव में फुटबॉल का विकास अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है।

अब सुधार की जरूरत

दर्शकों की संख्या के मामले में फुटबॉल भारत का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है। देश में करीब 30 करोड़ फुटबॉल दर्शक हैं, जबकि क्रिकेट 61 करोड़ दर्शकों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद कबड्डी (28 करोड़), रेसलिंग (16 करोड़), हॉकी (15 करोड़) और बैडमिंटन (14.5 करोड़) का नंबर आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्लबों और अकादमियों में निवेश बढ़ाने, स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर प्रतियोगिताओं का विस्तार करने तथा भारतीय मूल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय फुटबॉल ढांचे से जोड़ने से स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।

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