BREAKING

छत्तीसगढबड़ी खबरराज्य

ऑयल पाम की खेती से जशपुर के किसानों की आय में बढ़ेगा नया आयाम

100 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 43 हेक्टेयर में हो चुका रोपण

फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई, बोरवेल और चार वर्ष तक रखरखाव व अंतर्वर्ती खेती के लिए मिलेगा अनुदान

100 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 43 हेक्टेयर में हो चुका रोपण

देश को खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम’ योजना जशपुर जिले में किसानों के लिए आय के नए अवसर लेकर आई है। जिले में ऑयल पाम की खेती को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत जशपुर जिले को 100 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके विरुद्ध अब तक 43 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का सफल रोपण किया जा चुका है।

उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को ऑयल पाम की उन्नत खेती से जोड़ने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मेगा प्लांटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। घोलेंग विकासखंड जशपुर, भुरसाकोना विकासखंड बगीचा तथा टिकलीपारा विकासखंड फरसाबहार में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। इस दौरान किसानों को ऑयल पाम की खेती की तकनीक, पौध रोपण, सिंचाई, रखरखाव और अंतर्वर्ती फसल के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यक्रमों में सहायक संचालक उद्यान सहित विकासखंड स्तर के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

पौध सामग्री के लिए प्रति हेक्टेयर 29 हजार रुपये का अनुदान
योजना के तहत किसानों को उच्च गुणवत्तायुक्त ऑयल पाम पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित प्रावधान के अनुसार 9×9 मीटर की दूरी पर 143 पौधे प्रति हेक्टेयर लगाए जाते हैं। इम्पोर्टेड पौध सामग्री के व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए 29 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान का प्रावधान है।
फेंसिंग और ड्रिप सिंचाई से खेती होगी अधिक सुरक्षित और आधुनिक

ऑयल पाम के पौधों की सुरक्षा के लिए किसानों को फेंसिंग हेतु 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा बेहतर जल प्रबंधन के लिए ड्रिप सिंचाई हेतु 14,130 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाता है। इसके साथ ही सफल बोर के लिए 50 हजार रुपये तक सहायता का प्रावधान है। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा विकसित करने और फसल को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

पम्प के लिए भी मिलेगा अनुदान
दो हेक्टेयर अथवा उससे अधिक क्षेत्र में ऑयल पाम का रोपण करने वाले अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, लघु एवं सीमांत तथा महिला हितग्राहियों को डीजल/इलेक्ट्रिक पम्प के लिए 10 हजार रुपये प्रति पम्प तथा अन्य हितग्राहियों को 8 हजार रुपये प्रति पम्प अनुदान का प्रावधान है।
चार वर्षों तक रखरखाव के लिए आर्थिक सहायता

ऑयल पाम के शुरुआती विकास और किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पौधों के रखरखाव हेतु भी चार वर्षों तक अनुदान दिया जाएगा। प्रथम वर्ष से चतुर्थ वर्ष तक प्रत्येक वर्ष 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता खाद, दवा, उर्वरक, गैप फिलिंग और सिंचाई जैसे कार्यों के लिए दिए जाने का प्रावधान है।
अंतर्वर्ती खेती से एक ही खेत से मिलेगा दोहरा लाभ
ऑयल पाम के पौधों के बीच खाली स्थान का उपयोग कर किसान अंतर्वर्ती फसलें भी ले सकेंगे। इसके लिए प्रथम से चतुर्थ वर्ष तक प्रत्येक वर्ष 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान का प्रावधान है। इससे किसानों को ऑयल पाम के साथ-साथ अंतर्वर्ती फसलों से अतिरिक्त आय प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ने पर जोर
उद्यानिकी विभाग द्वारा जिले के शेष भौतिक लक्ष्य को शीघ्र पूरा करने के लिए किसानों को ऑयल पाम की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आधुनिक सिंचाई, फसल सुरक्षा, पौध रखरखाव और अंतर्वर्ती खेती जैसी सुविधाओं के साथ यह योजना जशपुर के किसानों के लिए दीर्घकालिक और अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बन सकती है। विभाग का लक्ष्य है कि जिले के अधिक से अधिक किसान इस महत्वाकांक्षी योजना से जुड़कर इसका लाभ उठाएं और कृषि आय को नई ऊंचाई दें।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts