रायपुर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने वाली आयुष्मान भारत योजना में कथित गड़बड़ियों का बड़ा मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाले 16 निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन निरस्त कर दिया है। विभाग की ओर से प्रदेश के 19 अस्पतालों की जांच कराई गई थी, जिसमें 16 अस्पतालों में अलग-अलग प्रकार की अनियमितताएं पाई गईं। कार्रवाई में सबसे अधिक 8 अस्पताल राजधानी रायपुर के शामिल हैं।
मरीजों के इलाज के नाम पर वसूली और कमीशन का खेल
स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इनमें मरीजों को बिना आवश्यकता अस्पताल में भर्ती करना, इलाज के पैकेज की गलत कोडिंग कर योजना से अधिक भुगतान लेना, मरीजों से अतिरिक्त शुल्क वसूलना और फर्जी दस्तावेज तैयार करना शामिल है।
इसके अलावा कुछ अस्पतालों द्वारा एजेंटों के माध्यम से आयुष्मान कार्डधारक मरीजों को अस्पताल तक लाने की व्यवस्था किए जाने के मामले भी सामने आए हैं। जांच में इन गतिविधियों को योजना के नियमों के विपरीत पाया गया।
मीडिया पड़ताल के बाद हरकत में आया विभाग
इस पूरे मामले को लेकर मीडिया में हुई खोजी पड़ताल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की थी। पड़ताल के दौरान कुछ रिपोर्टर्स ने मरीज उपलब्ध कराने वाले एजेंट बनकर निजी अस्पतालों से संपर्क किया था। इस दौरान अस्पतालों से जुड़े लोगों द्वारा आयुष्मान कार्डधारक मरीज उपलब्ध कराने के बदले इलाज की राशि का 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन देने की पेशकश किए जाने की बात सामने आई थी।
डमी मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने से संबंधित बातचीत भी कैमरे में रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद विभाग ने संबंधित अस्पतालों की जांच कराई।
19 में से 16 अस्पतालों में मिली गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 19 अस्पतालों में से 16 में अनियमितताओं की पुष्टि हुई, जबकि तीन अस्पतालों में कोई बड़ी गड़बड़ी दर्ज नहीं की गई।
जांच में सामने आए प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- 11 अस्पतालों में मरीजों से अतिरिक्त राशि वसूलने के मामले मिले।
- 7 अस्पतालों में अनावश्यक रूप से मरीजों को भर्ती किया गया।
- 5 अस्पतालों में इलाज के पैकेज की गलत कोडिंग पाई गई।
- 6 अस्पतालों में एजेंटों के माध्यम से मरीज लाने की व्यवस्था मिली।
- 2 अस्पतालों में फर्जी दस्तावेज तैयार करने की अनियमितता सामने आई।
रायपुर के 8 अस्पताल कार्रवाई के घेरे में
राजधानी रायपुर के जिन अस्पतालों में अलग-अलग प्रकार की गड़बड़ियां पाई गईं, उनमें अनंत साई अस्पताल, एसके केयर अस्पताल, महावीर अस्पताल, श्रीनिवास अस्पताल, वरदान अस्पताल, सुयश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हेरिटेज अस्पताल और रावतपुरा सरकार अस्पताल शामिल हैं।
जांच में अनंत साई अस्पताल में एजेंटों के जरिए मरीज लाने, एसके केयर और महावीर अस्पताल में अतिरिक्त शुल्क वसूली, जबकि श्रीनिवास अस्पताल में फर्जी दस्तावेज और एजेंटों के माध्यम से मरीज लाने की अनियमितताएं दर्ज की गईं।
वरदान अस्पताल में पैकेज की गलत कोडिंग और दस्तावेजों की कमी, सुयश इंस्टीट्यूट में अतिरिक्त वसूली तथा हेरिटेज अस्पताल और रावतपुरा सरकार अस्पताल में अतिरिक्त वसूली, गलत पैकेज कोडिंग और एजेंटों के माध्यम से मरीज लाने जैसे मामले सामने आए।
दूसरे जिलों के अस्पतालों में भी मिली गड़बड़ी
रायपुर के अलावा दुर्ग, बिलासपुर, कोंडागांव, कोरबा, बस्तर और कबीरधाम जिले के अस्पताल भी जांच के दायरे में आए।
दुर्ग के पल्स अस्पताल में गलत पैकेज कोडिंग और अतिरिक्त वसूली तथा शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में अनावश्यक भर्ती और अतिरिक्त शुल्क लेने की अनियमितता पाई गई।
बिलासपुर के अशोक प्रसूति मंदिर में गलत पैकेज कोडिंग, अतिरिक्त वसूली और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले सामने आए, जबकि केयर एन क्योर मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में अतिरिक्त राशि वसूलने की गड़बड़ी दर्ज की गई।
इसी तरह कोंडागांव के नेताम अस्पताल एवं इन्फर्टिलिटी सेंटर, कोरबा के हरि कृष्णा केयर अस्पताल, बस्तर के स्वामी चंद्रशेखरानंद अस्पताल और कबीरधाम के जय जगन्नाथ हेल्थकेयर में भी अलग-अलग प्रकार की अनियमितताएं सामने आईं।
नर्सिंग होम एक्ट के तहत भी होगी अलग कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल संबंधित अस्पतालों का आयुष्मान योजना के अंतर्गत पंजीयन निरस्त किया है। हालांकि, मामला यहीं समाप्त नहीं होगा। अस्पतालों के संचालन और चिकित्सा सुविधाओं से संबंधित नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए नर्सिंग होम एक्ट के तहत अलग कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इसके लिए विभाग ने अलग टीम गठित की है। इस कानून के तहत अस्पतालों के पंजीयन, चिकित्सा सुविधाओं, चिकित्सकीय स्टाफ और मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के निर्धारित मानकों की जांच की जाती है। गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर अस्पताल का संचालन संबंधी पंजीयन भी निरस्त किया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त संचालक इंद्रजीत बर्मन ने बताया कि जांच में जिन अस्पतालों में अनियमितताएं पाई गई थीं, उनके आयुष्मान योजना के पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की गई है। नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए अलग से टीम गठित कर दी गई है।
इस कार्रवाई के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की अगली जांच पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अस्पतालों में मरीजों के अधिकारों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के पारदर्शी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।









