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फाल्गुन अमावस्या कल, जानें पूजा विधि, उपाय, मंत्र से लेकर सबकुछ

हर महीने आने वाली अमावस्या का हिंदू धर्म में खास महत्व माना जाता है। मान्यता है कि अमावस्या पितरों को समर्पित तिथि होती है। इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान और पूजा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा भी है। माना जाता है कि इस तिथि पर किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। फाल्गुन महीने की अमावस्या को पितृ कार्यों के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भी शुभ माना गया है।

फाल्गुन अमावस्या 2026 की तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि 16 फरवरी 2026, सोमवार शाम 5:34 बजे से शुरू होकर 17 फरवरी 2026, मंगलवार शाम 5:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार फाल्गुन अमावस्या का व्रत और स्नान-दान 17 फरवरी 2026 को किया जाएगा।

शुभ मुहूर्त (17 फरवरी 2026):

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 5:00 से 5:55 बजे तक

स्नान-दान का समय: सुबह से सूर्यास्त तक

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर करीब 12:10 से 12:55 बजे तक

फाल्गुन अमावस्या का महत्व- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए किए गए तर्पण और दान से पितृ दोष से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं। इस दिन दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। माना जाता है कि पितर अमावस्या के दिन सूर्यास्त तक घर के आसपास रहते हैं और संतुष्ट होने पर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इस तिथि पर देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भी विशेष पूजा की जाती है।

फाल्गुन अमावस्या की पूजा-विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

अगर संभव हो तो किसी नदी, तालाब या सरोवर में स्नान करें। घर पर नहाते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिला सकते हैं।

स्नान के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं।

सूर्य देव को अर्घ्य दें और पितरों का तर्पण करें।

अगर सामर्थ्य हो तो उपवास रखें।

पितरों के नाम से जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दान दें।

भगवान विष्णु का ध्यान और पूजा करें।

शिव भक्ति के लिए भगवान शंकर की पूजा-अर्चना भी करें।

पूजा-सामग्री की लिस्ट- चंदन, अक्षत, पान, सुपारी, फल, फूल, रोली, कुमकुम, धूप, घी, दीपक, शुद्ध जल, गंगाजल, आसन और मिष्ठान।

फाल्गुन अमावस्या पर क्या करें-

पितरों के नाम से दान करें।

पीपल के पेड़ की पूजा कर जल और दीपक अर्पित करें।

मन को शांत रखें और किसी से झगड़ा न करें।

जरूरतमंद लोगों की मदद करें।

फाल्गुन अमावस्या पर क्या न करें

इस दिन नाखून और बाल कटवाने से बचें।

तामसिक भोजन से दूरी रखें।

बेवजह वाद-विवाद न करें।

मन में नकारात्मकता न रखें।

फाल्गुन अमावस्या मंत्र- फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों की शांति और आशीर्वाद के लिए “ॐ पितृदेवाय नमः” और “ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः” मंत्र का जप किया जा सकता है। स्नान के बाद तर्पण देते समय इन मंत्रों को मन में श्रद्धा के साथ 11 या 108 बार बोलें। इस दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। शिव भक्ति के लिए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप भी किया जा सकता है।

फाल्गुन अमावस्या उपाय- फाल्गुन अमावस्या के दिन सुबह स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण करें और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करें। घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का चौमुखा दीया जलाना शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाकर दीपक जलाएं और मन में शांति की कामना करें। जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें। अगर शनि से जुड़ी परेशानी महसूस होती है तो इस दिन शनि जी का स्मरण कर साधारण पूजा करें।

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