मंगलवार को ईरान के गेराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया। यह झटका ऐसे समय पर आया है जब ईरान और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के बढ़ते सैन्य तनाव चर्चा में हैं। भूकंप के बाद दुनियाभर में चिंता की लहर फैल गई, क्योंकि इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़ा जाने की आशंका जताई जा रही है।
इस प्राकृतिक आपदा ने पहले से ही तनावपूर्ण क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य अनिश्चितता को और बढ़ा दिया। हालांकि, राहत की बात यह है कि भूकंप से किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है।
फारस प्रांत में हाल ही में महसूस हुए भूकंप ने लोगों में डर और तनाव पैदा कर दिया है, खासकर जब वे पहले से ही युद्ध की स्थिति में हैं। धमाकों और बमबारी के बीच आए इस भूकंप ने कई लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। कुछ लोग सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो शेयर कर रहे हैं, हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या मौतों की सूचना नहीं मिली है। USGS के अनुसार, यह इलाका पहले से ही सेस्मिक एक्टिविटी वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, और इसे प्राकृतिक टेक्टॉनिक गतिविधि माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर कुछ अफवाहें भी फैल रही हैं कि क्या यह ईरान का परमाणु परिक्षण तो नहीं था, खासकर युद्ध के चलते ईरान केपरमाणु साइट्स पर हमले हो रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों और USGS ने इसे खारिज किया, यह बताते हुए कि 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप परमाणु परिक्षण जैसा नहीं होता, क्योंकि टेस्ट में आमतौर पर ज्यादा तीव्रता और अलग पैटर्न होता है। ईरान में भूकंपों की गतिविधि पहले भी रही है, और यहां सालभर छोटे झटके आते रहते हैं।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब तेहरान में अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक्स जारी हैं। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है, जबकि गल्फ देशों में ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। कुल मौतों की संख्या 1200 के पार जा चुकी है, और तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर हैं। ऐसे में युद्ध और प्राकृतिक आपदा का यह संयोजन स्थिति को और जटिल बना सकता है।









