मथुरा-वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज का वीडियो आए दिन सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है। ऐसे में संत प्रेमानंद जी महाराज ने इस साल की होली को लेकर भक्तों को एक बड़ी चेतावनी दी है। अगर आप भी 3 मार्च को रंग खेलने की योजना बना रहे हैं, तो रुक जाइए इस बार पंचांग और ग्रहों की चाल कुछ ऐसा इशारा कर रही है जो आपकी खुशियों में खलल डाल सकता है।
आखिर क्यों 3 मार्च को रंग खेलना पड़ेगा भारी?
आमतौर पर होलिका दहन के अगले दिन रंग खेला जाता है, लेकिन 2026 की होली की गणित थोड़ी अलग है।
तारीख और पंचांग
आमतौर पर होली होलिका दहन के अगले दिन खेली जाती है। लेकिन इस बार 3 मार्च का दिन पंचांग और ग्रहों की चाल के हिसाब से अशुभ मानी जा रही है।
ग्रहों की स्थिति
कुछ ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन शनि और राहु की स्थिति रंग खेलने वालों के लिए अनुकूल नहीं है, जिससे छोटी-छोटी परेशानियां या असफलताएं हो सकती हैं।
संत प्रेमानंद जी महाराज ने भक्तों को यही सलाह दी है कि इस बार होली खेलते समय सावधानी बरतें, खासकर रंग, पानी और भीड़ में।
इस साल की तारीख और ग्रहों की चाल सामान्य होली से अलग है, इसलिए 3 मार्च को उत्साह के साथ खेलने से पहले सोच-समझ लेना बुद्धिमानी होगी।
सूतक काल का नियम
शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक के दौरान कोई भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या उत्सव मनाना वर्जित माना गया है।
प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि सूतक काल में रंग खेलना या शोर-शराबा करना महापाप की श्रेणी में आता है, क्योंकि यह समय ईश्वर भक्ति और संयम का होता है, न कि उल्लास का।
इस बार 3 नहीं, 4 मार्च को जमेगा रंग
भारत के कई हिस्सों में लोग अभी भी इस दुविधा में हैं कि होली कब खेलें। लेकिन सही जानकारी यह है कि ग्रहण के दोष से बचने के लिए इस बार रंग वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी। इतिहास में ऐसा बहुत कम बार हुआ है जब होलिका दहन और धूलेंडी (रंग) के बीच एक पूरे दिन का अंतर आया हो।









