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समाजसेवी कुबेर राठी ने चामुण्डा दरबार में टेका मत्था, ‘हनुमान सेवा’ के 15 वर्ष हुए पूर्ण

  • माँ चामुण्डा का आशीर्वाद और बजरंगबली की कृपा: रायपुर की धरा पर समाजसेवी कुबेर राठी का अनवरत सेवा यज्ञ
  • ज्योति कलश के दर्शन कर कुबेर राठी ने की ‘सर्वे भवन्तु सुखिन’ की मंगल कामना
  • 15 वर्षों से प्रज्वलित है सेवा की अखंड ज्योति,समिति के स्तंभ कुबेर राठी बोले-प्रभु की इच्छा तक जारी रहेगा दीन-दुखियों का यह भंडारा
  • माता के दर्शन के बाद भावुक हुए समाजसेवी कुबेर राठी,बोले-जब तक प्राण हैं, करता रहूँगा जनसेवा

रायपुर । शक्ति की उपासना के पावन पर्व ‘शारदीय नवरात्रि’ के अवसर पर पूरे देश सहित छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भक्ति की अविरल धारा बह रही है। इसी क्रम में राजधानी के प्रतिष्ठित समाजसेवी और जन-जन के प्रिय कुबेर राठी ने शनिवार को विभिन्न शक्तिपीठों और मंदिरों के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए मंगल कामना की।

समाजसेवी कुबेर राठी सर्वप्रथम केंद्रीय जेल परिसर स्थित आदि शक्ति श्री चामुण्डा देवी मंदिर पहुंचे। पौराणिक मान्यताओं के अनुरूप, उन्होंने आदि शक्ति श्री चामुण्डा देवी के विग्रह की शास्त्रोक्त विधि से पूजा-अर्चना की। मंदिर की गरिमा और वहां प्रज्वलित ‘ज्योति कलश’ की आभा के बीच समाजसेवी राठी ने परिक्रमा पूर्ण कर समस्त प्रदेशवासियों के आरोग्य और ऐश्वर्य की प्रार्थना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि माँ की कृपा ही समस्त सृष्टि का आधार है और उनके दर्शन मात्र से ही जीवन के संताप मिट जाते हैं।

माँ चामुण्डा के दर्शन के पश्चात समाजसेवी कुबेर राठी रेलवे स्टेशन स्थित सर्व धर्म हनुमान मंदिर पहुंचे। समिति के संरक्षक होने के नाते उन्होंने सर्वप्रथम बजरंगबली की पूजा अर्चना और आरती की। नवरात्रि के विशेष शनिवार पर यहाँ भव्य भंडारे का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर समाजसेवी कुबेर राठी ने भावुक स्वर में कहा कि यह प्रभु बजरंगबली की ही असीम अनुकंपा है कि मुझे पिछले 15 वर्षों से इस पुनीत कार्य का माध्यम बनने का सौभाग्य मिल रहा है। मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जब तक मेरे शरीर में अंतिम सांस है, मैं इसी प्रकार दीन-दुखियों और श्रद्धालुओं की सेवा में समर्पित रहूँ।

विदित हो कि वर्ष 2009 से शुरू हुआ सेवा का यह सिलसिला आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। जहां लगभग 8000 से 10000 लोग हर शनिवार महाभंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि इस पूरे आयोजन में कुबेर राठी का मार्गदर्शन और सहयोग रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करता है।

कार्यक्रम की गरिमा तब और बढ़ गई जब समाजसेवी कुबेर राठी ने स्वयं आगे बढ़कर कतार में खड़े श्रद्धालुओं और राहगीरों को अपने हाथों से महाभंडारे का महाप्रसाद वितरित किया। उन्होंने संदेश दिया कि सेवा का कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, महत्वपूर्ण उसमें निहित ‘भाव’ होता है। मंदिर परिसर में उमड़ी भारी भीड़ ने कुबेर राठी के इस सादगीपूर्ण व्यवहार और सेवा भाव की मुक्त कंठ से सराहना की।

इस अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने भक्ति और सेवा के इस समागम में हिस्सा लिया।

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