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विधायक ललित चंद्राकर की शिकायत पर कुलपति के खिलाफ जांच: हाई पावर कमेटी पहुंची हेमचंद यादव यूनिवर्सिटी; नस्तियों और रिकॉर्ड की पड़ताल

दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति मंगलवार को विश्वविद्यालय पहुंची।

समिति ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित नस्तियों, नोटशीट और अन्य अभिलेखों की जांच की। कुलपति से मांगे गए दस्तावेज तय समय सीमा में उपलब्ध नहीं होने के बाद समिति के सीधे विश्वविद्यालय पहुंचने से प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।

यह शिकायत विधायक और छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ललित चंद्राकर ने कुलाधिपति के समक्ष की थी। इसके बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की।

समिति की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल कर रहे हैं। राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना और उप सचिव निधि साहू सदस्य हैं, जबकि अवर सचिव अनुभव शर्मा को संयोजक बनाया गया है। समिति को 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपनी है।

8 नए पाठ्यक्रमों की प्रक्रिया पर सवाल

शिकायतों में एमबीए, एमसीए और पीजीडीबीएम समेत आठ नए पाठ्यक्रमों के निरीक्षण के लिए एआईसीटीई और आरसीआई की प्रक्रिया शासन की पूर्व अनुमति के बिना कराने का आरोप है। एक संस्था को अलग स्वरूप में प्रस्तुत करने की शिकायत भी की गई है।

इसके अलावा पांच विषयों के विभाग शुरू होने और विद्यार्थियों के प्रवेश से पहले 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। बड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को कार्यपरिषद के समक्ष नहीं रखने तथा बिना विधिवत निविदा करीब 40 लाख रुपए की 380 पुस्तकें खरीदने का आरोप भी शिकायत में शामिल है।

दस्तावेज नहीं मिले तो उपलब्ध रिकॉर्ड से फैसला

राज्यपाल सचिवालय ने पहले 24 अगस्त तक संबंधित दस्तावेज मांगे थे। कुलपति के समय बढ़ाने के अनुरोध के बाद यह अवधि 31 अगस्त तक की गई।

अंतिम अवसर देते हुए नस्तियां, नोटशीट और अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही रिकॉर्ड नहीं मिलने पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने की बात कही गई थी।

उत्तरपुस्तिका मामले में कुलपति को राहत

इधर उत्तरपुस्तिका खरीदी मामले में जांच समिति ने कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन को राहत दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ संवाद के जरिए उत्तरपुस्तिकाओं की छपाई की प्रक्रिया शासन के निर्देशों के अनुसार हुई थी।

50 हजार पूरक उत्तरपुस्तिकाओं की गुणवत्ता जांच में कमी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने भुगतान रोककर स्पष्टीकरण मांगा था। समिति के अनुसार सत्र 2025-26 की इन उत्तरपुस्तिकाओं का भुगतान नहीं किया गया। इसलिए आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं बनता।

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