तमिलनाडु में शुरू से ही एक तस्वीर तो बिल्कुल साफ थी. मुख्य मुकाबला डीएमके और AIADMK के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच है. लेकिन, जाने माने एक्टर थलपति विजय की एंट्री के बाद तमिलनाडु की चुनावी लड़ाई काफी रोचक हो गया है.
सत्ताधारी डीएमके ने कई स्थानीय राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किया है, जिसमें राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस भी शामिल है. विपक्षी AIADMK का बीजेपी के साथ चुनावी गठबंधन है – और थलपति विजय अपनी नई पार्टी टीवीके के जरिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को लगभग बराबर ही चैलेंज कर रहे हैं. लेकिन, महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ लाए गए परिसीमन विधेयक के खिलाफ वो डीएमके नेता एमके स्टालिन से पूरी तरह इत्तेफाक रखते हैं. थलपति विजय पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं, लेकिन युवाओं के साथ-साथ तमिलनाडु के पारंपरिक वोटर उनके साथ जुड़ते देखे जा रहे हैं. अपनी फैन फॉलोविंग के बल पर विजय टीवीके को कितना वोट दिला पाते हैं, यह तो 4 मई को नतीजे आने पर ही मालूम हो पाएंगे – लेकिन एक बात तो तय मानी जा रही है कि विजय नुकसान दोनों ही गठबंधनों को पहुंचाएंगे.
तमिलनाडु चुनाव में एक्टर विजय फैक्टर
तमिलनाडु की राजनीति में सुपरस्टार का व्यापक प्रभाव देखा गया है, लेकिन हर स्टार कामयाब भी हो, कतई जरूरी नहीं है. विजय से पहले विजयकांत और कमल हासन जैसे सुपरस्टार भी सफल अभिनेता की तरफ कामयाब नेता बनने की कोशिश में मैदान में कूदे हैं, लेकिन बुरी तरह फ्लॉप रहे.
विजय की रैलियों में खूब भीड़ होती है. एक बार तो भगदड़ भी मची थी, और कई लोगों की मौत भी हो गई. विजय की लोकप्रियता का असर यह है कि न वो मीडिया से बात करते हैं, न ही कोई इंटरव्यू देते हैं. घुमाफिरा कर विजय भी द्रविड़ राजनीति के इर्द गिर्द ही नजर आते हैं, जिस पर पेरियार, अन्नादुरई, करुणानिधि और जयललिता के बाद अब मुख्यमंत्री एमके स्टालिन राजनीति कर रहे हैं. विजय डीएमके सरकार की खामियों पर बात तो करते हैं, लेकिन AIADMK और बीजेपी खिलाफ उनके उतने तीखे तेवर नहीं देखने को मिलते – लेकिन, महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ लाए गए परिसीमन विधेयक के खिलाफ उनके स्टैंड के. 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उतरे कमल हासन को कुल जमा 2.62 फीसदी ही वोट मिले थे. सीट तो एक भी नहीं मिली, कमल हासन तो अपनी कोयंबटूर साउथ सीट भी हार गए थे.
2006 में विजयकांत ने भी किस्मत आजमाई थी, और एक सीट जीतने में भी सफल रहे. विजयकांत का वोट शेयर भी कमल हासन से बेहतर दर्ज हुआ था – 8.4 फीसदी.
लेकिन 1977 में तब के सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन को जो कामयाबी मिली थी, अब तक कोई भी नहीं दोहरा सका है. सफल तो फिल्मी दुनिया से राजनीति में आईं जे. जयललिता भी हुईं – लेकिन लंबे इंतजार और कड़े संघर्ष के बाद ही.
एमजी रामचंद्रन को 130 विधानसभा सीटें मिल गई थीं, और उनको मिला वोट शेयर था, 30.47 – सवाल यह है कि क्या विजय भी एमजीआर जैसी कामयाबी हासिल कर सकते हैं?
अगर विजय भी MGR की तरह चल गए, तो कैसे नतीजे होंगे?
इंडिया टुडे टीवी की एक रिपोर्ट में थलपति विजय की पार्टी टीवीके के प्रदर्शन की संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है. असल में, तमिलनाडु की राजनीति में विजय का प्रभाव उनके वोट शेयर से ही तय होगा. और, अगर विजय का वोट शेयर ज्यादा हुआ तो AIADMK से ज्यादा नुकसान एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके को हो सकता है.









