भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच नया मोड़ एक तरफ जहां भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौता फ्रेमवर्क तैयार कर लेने की सकारात्मक घोषणा की है, वहीं दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने एक बार फिर ‘टैरिफ बम’ फोड़कर व्यापारिक दुनिया में हलचल मचा दी है। बुधवार, 3 जून 2026 को अमेरिकी प्रशासन ने भारत सहित दुनिया के 60 प्रमुख व्यापारिक भागीदार देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव पेश किया है।
अमेरिकी सरकार ने यह कठोर कदम उठाने के पीछे मानवाधिकारों और श्रम नियमों का हवाला दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन 60 देशों में जबरन मजदूरी के जरिए सामान तैयार किया जाता है और इन देशों ने ऐसे सामान के आयात पर लगे प्रतिबंधों को सही तरीके से लागू नहीं किया है। अमेरिका का तर्क है कि इससे अमेरिकी कामगारों को वैश्विक बाजार में ‘असमान और अनुचित’ प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
नए प्रस्ताव के अनुसार, देशों को दो श्रेणियों में बांटा गया है जिन पर 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा
- 12.5% अतिरिक्त टैरिफ: भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
- 10% अतिरिक्त टैरिफ: कनाडा, मेक्सिको, ताइवान, ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।
यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के राजदूत जैमिसन ग्रीयर ने इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हमारे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों का जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने में विफल रहना ‘अस्वीकार्य’ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर देश को यह सुनिश्चित करना होगा कि वैश्विक व्यापार अनजाने में भी जबरन मजदूरी को बढ़ावा न दे।
राहत की बात यह है कि ये नए टैरिफ अभी तुरंत प्रभावी नहीं होंगे। अमेरिकी कानून के अनुसार, इन टैरिफ को लागू करने से पहले जनता की राय ली जाएगी और पूरे प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक वार्ताओं पर असर पड़ सकता है और भविष्य में निर्यात महंगा होने से भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।









