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दिल्ली मार्च की तैयारी में किसान, शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी; पुलिस अलर्ट

पंजाब और हरियाणा समेत देश के हजारों किसान आज दिल्ली कूच के लिए शंभू बॉर्डर पर जुट रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के खिलाफ किया जा रहा है। इसी समझौते को खत्म करने की मांग को लेकर देश बचाओ मोर्चा की ओर से इस आंदोलन को बुलाया गया है। इससे पहले सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी को दिल्ली में प्रस्तावित किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए जा रहे चढ़ूनी को हिरायाणा पुलिस ने अपने हिरासत में ले लिया था।

किसानों की बढ़ती संख्या और प्रस्तावित दिल्ली महापंचायत को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वहीं, बीएनएस की धारा-163 लागू कर दिया गया है। इसके अलावा दोनों तरफ से सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और वाहनों के आवाजाही पर पूरी तरह से रोक है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अमृतसर और गुरदासपुर से किसानों को जत्था शंभू बॉर्डर के रास्ते दिल्ली पहुंचने की तैयारी में है। किसानों की मांगों में सबसे प्रमुख यह है कि अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को जल्द रद्द कर दिया जाए। किसानों के तरफ से दावा किया जा रहा है कि अगर यह डील लागू होता है तो इसका सीधा असर भारतीय कृषि, डेयरी और गांवों में रहने वाले लोगों की इनकम पर होगा। किसानों का साफ तौर पर कहना है कि अगर विदेशी उत्पाद भारतीय बाजारों में आता है तो देसी किसानों को भारी नुकसान का सामना करना होगा। यहां तक की उनका धंधा बंद भी हो सकता है।

किसानों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रदर्शन में संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक और किसान मजदूर मोर्चा के नेता भी जल्द शामिल होने के लिए पहुंचने वाले हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे, जिनकी मौजूदगी इस आंदोलन के लिए अहम माना जा रहा है। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़ बंदोबस्त किए हैं। भारी संख्या में पुलिसबल दंगा विरोध गियर मौके पर तैनात हैं।

वहीं, किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने भी भारत-अमेरिका डील का विरोध किया है। किसानों के दिल्ली कूच पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि शंभू बॉर्डर बंद कर दिया गया है। सरकार किसानों से बातचीत कर समस्या का हल निकालने की बजाय, किसानों से टकराने की नीति अपना रही है। देश में न युवाओं की बात सुनी जा रही है और न ही किसानों और मजदूर को अपना बात रखने का मौका दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ चार घंटे के लिए जाना चाह रहे हैं। दिल्ली का किसान घाट किसानों का है लेकिन वहां भी नहीं जाने दे रहे हैं।

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