ममता बनर्जी की मुश्किलें फिलहाल खत्म होने के आसार नहीं हैं। सोमवार को बागी गुट में शामिल एक नेता ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के और भी नेता जल्द ही टूटने वाले हैं। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब राज्यसभा से चार सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, रविवार को ही 20 बागी सांसदों ने पूर्वोत्तर की एक पार्टी के साथ विलय कर लिया है।
सोमवार को टीएमसी सांसद अरू चक्रवर्ती ने अभिषेक बनर्जी का नाम लिए बगैर जमकर निशाना साधा और गद्दार कहे जाने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘गद्दार कौन होता है। जो पार्टी वर्कर को कस्टडी में डाल देता है। …जो वर्कर को नहीं देखता है जो कस्टडी में है, जो घर छोड़कर आया है। उसपर नजर नहीं रखता है। वही गद्दार है। जो गद्दार बोलता है न उसे बोलो की शीशे में मुंह देखो की गद्दार कौन है।’
चक्रवर्ती ने दावा किया कि बागी गुट भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थक है। उन्होंने कहा, ‘सायोनी घोष को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘सभी तो दीदी के साथ है। हम भी तो दीदी के साथ हैं। हम लोग को दीदी को देखकर ही पार्टी में आया था। सब तो दीदी के साथ में आया था। दीदी की उम्र हो गई है। उन्हें काम नहीं करने दे रहे।’
अब कौन और छोड़ेगा पार्टी को लेकर उन्होंने कहा, ‘सब आएंगे पार्टी में। कहां जाएगा। सब आएगा। सभी को राजनीति में रहना है। सुधार होगा। हम हमारी पार्टी में सुधार करना चाहते हैं।’
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार हुई थी। इसके बाद से ही पार्टी में खटपट का दौर शुरू हो गया था और सबसे पहले असर नगरपालिकाओं में देखा गया। बड़ी संख्या में पार्षदों ने इस्तीफे दे दिए थे। इसके बाद जब बनर्जी ने आवास पर बैठक बुलाई तो कम संख्या में विधायक पहुंचे और विरोध प्रदर्शन में भी आंकड़ा कम ही रहा।
रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई में पार्टी के आधे से ज्यादा विधायक बागी हो गए थे। कहा जा रहा है कि नाराज विधायकों की संख्या 64 पर पहुंच गई है। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ा अब तक स्पष्ट नहीं है। इधर, राज्यसभा में बीते सप्ताह 4 दिनों के अंदर चार सांसदों ने इस्तीफे दे दिए थे। इनमें सुखेंदु शेखर रे, कोयल मलिक, सुष्मिता देव और प्रकाश बरेक का नाम शामिल है।
इधर, 20 सांसदों ने भी टीएमसी से अलग राह पकड़ ली थी और रविवार को एनसीपीआई में विलय कर लिया था। अटकलें हैं कि गुट जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग का रुख कर सकता है।









