BREAKING

बड़ी खबर

चीन से नजदीकी के बीच नेपाल को बड़ा झटका, हिमालय ने बजाई खतरे की घंटी

नेपाल पिछले कुछ वर्षों से चीन के साथ अपने रिश्तों को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सड़क, व्यापार और सीमा-पार कनेक्टिविटी को लेकर दोनों देशों के बीच कई महत्वाकांक्षी योजनाएं सामने आई हैं। नेपाल के लिए चीन से जुड़ना आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन 26 अगस्त की प्राकृतिक आपदा ने इन योजनाओं की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी।

चीन और नेपाल के बीच संपर्क का सबसे कठिन हिस्सा हिमालय से होकर गुजरता है। तिब्बत से आने वाला सड़क नेटवर्क नेपाल की सीमा तक पहुंचता है और आगे नेपाली हाईवे इसे काठमांडू से जोड़ते हैं। यह मार्ग व्यापार के लिहाज से अहम है, लेकिन पूरा इलाका ग्लेशियर, भूस्खलन, बर्फीली झीलों और भूकंपीय गतिविधियों के कारण बेहद संवेदनशील है।

26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने इस संवेदनशीलता को सामने ला दिया। चीन के क्यिरुंग क्षेत्र और नेपाल के रसुवागढ़ी इलाके में सड़क, पुल और व्यापारिक ढांचे प्रभावित हुए। नेपाल की तरफ बेत्रावती से रसुवागढ़ी सीमा तक सड़क के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा। इससे सीमा-पार आवाजाही और व्यापार पर भी असर पड़ा।

सबसे चिंता की बात यह है कि हिमालयी क्षेत्र के इन खतरों को लेकर वैज्ञानिक पहले ही चेतावनी दे चुके हैं। 2024 के एक अध्ययन में चीन-नेपाल परिवहन गलियारों के आसपास बड़ी संख्या में ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई थी। इनमें कई झीलों को ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़ यानी GLOF के लिहाज से संवेदनशील बताया गया था। अध्ययन में क्यिरुंग-काठमांडू कॉरिडोर को भी उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया था।

हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि हालिया तबाही सीधे सड़क निर्माण की वजह से हुई। प्राकृतिक आपदा इसका तत्काल कारण थी। लेकिन हिमालय में तेजी से बढ़ती निर्माण गतिविधियां एक गंभीर सवाल जरूर खड़ा करती हैं। जब पहाड़ काटकर सड़कें चौड़ी की जाती हैं और सुरंग, पुल तथा दूसरे बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाते हैं, तो संवेदनशील इलाकों में मानव और बुनियादी ढांचे की मौजूदगी भी बढ़ती है।

नेपाल के लिए चीन से जुड़ना एक रणनीतिक विकल्प हो सकता है, लेकिन भौगोलिक सच्चाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत के साथ नेपाल की कनेक्टिविटी अपेक्षाकृत आसान है, जबकि चीन तक पहुंचने के लिए उसे दुनिया के सबसे कठिन पर्वतीय इलाकों से गुजरना पड़ता है।

26 अगस्त की घटना ने यही संदेश दिया है कि चीन-नेपाल कनेक्टिविटी की राह सिर्फ राजनीति और व्यापार की नहीं, बल्कि प्रकृति की कठिन परीक्षा भी है।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts