दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक अहम फैसला लेते हुए ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) छोड़ने का ऐलान लिया है। तेल कार्टेल OPEC को छोड़ने का यूएई का फैसला सऊदी अरब को झटका देने के मकसद से लिया गया है। इससे पहले यूएई ने पाकिस्तान के पेंच कसते हुए उससे अपना कर्ज वापस मांगा था। इन दोनों घटनाक्रमों से लगता है कि यूएई ने पाकिस्तान-सऊदी अरब गठजोड़ के खिलाफ खुलकर आने का फैसला लिया है।
इंडिया टुडे के मुताबिक, यूएई वह देश है, जिसे ईरान के जोरदार हमले सहने पड़े हैं। यूएई चाहता है कि ईरान के खिलाफ मजबूत सैन्य अभियान चलाया जाए। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर ऐसा होने से रोक दिया। इस भूमिका से इस्लामाबाद को सौदेबाजी में बेहतर स्थिति मिलेगी। दूसरी तरफ यूएई के तेल के ठिकाने तबाह हो गए। इससे वह गुस्से में दिख रहा है।
चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने द फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि पाकिस्तान की मध्यस्थ वाली भूमिका से यूएई नाराज हुआ है। वह इस समय चीजों को पूरी तरह से ब्लैक एंड व्हाइट (या तो पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत) के नजरिए से देख रहा है। इसमें कोई तटस्थता या बीच का रास्ता नहीं है।
यूएई ने इस्लामाबाद को संकेत दिया था कि वह ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए। इस्लामाबाद ने इसको नहीं माना और खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश किया। यह यूएई को बिल्कुल रास नहीं आया है। ऐसे में यूएई ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के कर्ज की तत्काल वापसी की मांग कर डाली।
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में रक्षा समझौता किया था। इसके तहत दोनों देश एक पर हमले को खुद पर हमला मानेंगे। हालांकि सऊदी अरब में ईरान के हमलों पर इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया अलग रही। उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और रियाद को भरोसा दिलाया कि वह रक्षा समझौते का पालन करेगा।
खाड़ी देशों के बीच की दरार ऐसे भी दिखी कि यूएई के भारत के साथ मजबूत संबंध हैं। उसके इजरायल से भी अच्छे रिश्ते माने जाते हैं। वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की मिलकर एक गुट बनाने की कोशिश करते दिखे हैं। तीनों देशों के बीच एक त्रिपक्षीय सैन्य समझौते को लेकर भी चर्चा चल रही है।
सऊदी और यूएई के बीच यमन और सूडान में प्रभाव को लेकर आपसी खींचतान हैं। लाल सागर के बंदरगाहों और संसाधनों को लेकर दोनों देशों में प्रतिद्वंद्विता देखी गई है। इसके अलावा तेल उत्पादन के लक्ष्यों को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद रहे हैं। ऐसे में यूएई OPEC से ही हट गया, जिसका सऊदी अरब निर्विवाद और वास्तविक नेता रहा है।
यूएई का इस समूह से अलग होना ऐसे समय में एक प्रमुख सहयोगी और बड़े उत्पादक को इस दायरे से बाहर कर देता है, जब यह कार्टेल पहले से ही अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं के कारण दबाव में है। OPEC से बाहर निकलने से यूएई को बिना किसी कोटा पाबंदी के अपनी पूरी क्षमता से तेल निकालने की आजादी मिल गई है।









