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65 लाख बिजली उपभोक्ताओं की बढ़ेगी टेंशन, सितंबर के बिल में 13% शुल्क का असर

रायपुर। प्रदेश के करीब 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए सितंबर का बिल राहत देने वाला नहीं माना जा रहा है। अगस्त के बिजली बिल में कुल 13 फीसदी एफपीपीएएस (Fuel Power Purchase Adjustment Surcharge) शुल्क शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसमें पिछली अवधि से बचा 8 फीसदी शुल्क और अगस्त के लिए निर्धारित 5 फीसदी नया शुल्क शामिल है।

पिछले शुल्क का हिस्सा भी जुड़ेगा

अगस्त के लिए एफपीपीएएस की दर 16 फीसदी तय की गई थी। हालांकि, जुलाई में बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी को देखते हुए उपभोक्ताओं से उस समय केवल 10 फीसदी शुल्क ही वसूला गया। शेष 8 फीसदी राशि को आगे समायोजित किया जाना था।

अब इसी बकाया हिस्से को अगस्त के लिए तय 5 फीसदी नए शुल्क के साथ सितंबर में आने वाले बिल में जोड़ने की बात कही जा रही है। ऐसे में कुल एफपीपीएएस शुल्क 13 फीसदी तक पहुंच सकता है।

हर महीने अलग होती है एफपीपीएएस की दर

एफपीपीएएस की दर स्थायी नहीं होती, बल्कि बिजली खरीद की लागत और अन्य परिस्थितियों के आधार पर इसमें बदलाव होता रहता है। इस साल भी अलग-अलग महीनों में उपभोक्ताओं के बिल पर अलग दरें लागू हुईं।

जनवरी में दिसंबर के बिल पर 13.64 फीसदी, फरवरी में जनवरी के बिल पर 12.35 फीसदी के आसपास शुल्क लगाया गया था। इसके बाद मार्च में 5.91 फीसदी और अप्रैल में 4.24 फीसदी की दर सामने आई। मई में यह 3.98 फीसदी रही।

गर्मी के साथ बढ़ा बिजली खरीद का खर्च

गर्मी के महीनों में बिजली की मांग बढ़ने के कारण प्रदेश को अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ी। मांग पूरी करने के लिए बाहर से बिजली खरीदने का दबाव बढ़ा, जिसका असर एफपीपीएएस के जरिए उपभोक्ताओं के बिल पर दिखाई दिया।

जून में मई के बिल पर करीब 9.13 फीसदी और जुलाई में जून के बिल पर 11.33 फीसदी एफपीपीएएस शुल्क वसूला गया। इसके बाद अगस्त में जुलाई के बिल पर 10 फीसदी शुल्क लगाया गया।

बिजली संयंत्र बंद रहने का भी असर

बिजली की उपलब्धता पर संयंत्रों के बंद रहने का भी असर पड़ा। जानकारी के मुताबिक कोरबा में 210-210 मेगावाट क्षमता वाले दो बिजली संयंत्र करीब दो महीने तक बंद रहे। इनमें से एक 210 मेगावाट इकाई के अब भी बंद होने की बात कही जा रही है।

ऐसी स्थिति में मांग और उपलब्ध बिजली के बीच अंतर को पूरा करने के लिए बाहर से बिजली खरीदनी पड़ी। पावर कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, इसी तरह की परिस्थितियां एफपीपीएएस शुल्क बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

एफपीपीएएस शुल्क बिजली की खरीद लागत के हिसाब से बदलता रहता है और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के बिल पर पड़ता है। सितंबर के बिल में पिछली 8 फीसदी राशि के साथ नया 5 फीसदी शुल्क जुड़ने की स्थिति में उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ सकता है।

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