अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर चुनाव के बाद डेमोक्रेट्स कांग्रेस के किसी एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो वह उनके द्वारा भेजे गए विधेयकों को रोकने के लिए राष्ट्रपति की वीटो शक्ति का इस्तेमाल करेंगे।
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ऐसी स्थिति में वह खुद को “मिस्टर वीटो” बना लेंगे। उनका कहना था कि अगर रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस पर अपना नियंत्रण खो देती है, तो डेमोक्रेट्स के साथ कानून बनाने के लिए उन्हें बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
डेमोक्रेट्स के बिलों पर रोक लगाने की चेतावनी
ट्रंप के मुताबिक, अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में बहुमत हासिल कर लेते हैं और ऐसे विधेयक पारित करते हैं जिनसे वह सहमत नहीं हैं, तो राष्ट्रपति के तौर पर वह उन पर वीटो लगा सकते हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि वीटो के जरिए वह विपक्ष को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर करने की कोशिश करेंगे। ट्रंप का तर्क है कि कुछ समय तक राजनीतिक गतिरोध के बाद दोनों दलों को कानून पारित कराने के लिए समझौता करना ही पड़ेगा।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रिपब्लिकन पार्टी चुनाव में अपना बहुमत बनाए रखेगी और उन्हें इस रणनीति का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, बहुमत हाथ से निकलने की स्थिति में उन्होंने लगातार वीटो करने की बात कही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के पास कितनी वीटो पावर?
अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित किसी बिल को मंजूरी देने से इनकार करने का अधिकार देता है। इसे राष्ट्रपति का वीटो कहा जाता है।
हालांकि, राष्ट्रपति का वीटो अंतिम फैसला नहीं होता। अगर प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में दो-तिहाई बहुमत किसी बिल के पक्ष में मतदान कर दे, तो कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है।
ट्रंप ने अपने मौजूदा कार्यकाल में अब तक दो बार वीटो का इस्तेमाल किया है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने कुल 10 विधेयकों पर वीटो किया था।
मध्यावधि चुनाव पर टिकी नजरें
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान होता है, जबकि सीनेट की एक तिहाई सीटों के लिए चुनाव कराया जाता है। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति के बचे हुए कार्यकाल में उनकी राजनीतिक ताकत और नीतियों को आगे बढ़ाने की क्षमता पर सीधा असर डाल सकते हैं।
डेमोक्रेट्स का लक्ष्य कांग्रेस में अपना प्रभाव बढ़ाना है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी अपने बहुमत को बनाए रखने की कोशिश करेगी। ऐसे में चुनाव के नतीजे अमेरिकी राजनीति में आने वाले महीनों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की इच्छा पर भी बोले ट्रंप
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की संभावना पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर मौका मिला तो वह दोबारा चुनाव लड़ना पसंद करेंगे।
हालांकि, अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन किसी व्यक्ति को दो बार से अधिक राष्ट्रपति चुने जाने से रोकता है। इसलिए ट्रंप की यह टिप्पणी राजनीतिक और संवैधानिक दोनों नजरिए से चर्चा का विषय बन गई है।
मध्यावधि चुनाव के नतीजे यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि ट्रंप को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस का समर्थन मिलता है या आने वाले समय में उन्हें विपक्षी बहुमत वाली कांग्रेस के साथ काम करना पड़ता है।








