हर कुछ समय बाद कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर कोई न कोई नई रिपोर्ट सामने आती है। इसके साथ ही चर्चा शुरू हो जाती है—क्या प्रदूषण इसकी वजह है, क्या चीनी और प्रोसेस्ड फूड जिम्मेदार हैं, क्या प्लास्टिक या मोबाइल फोन से खतरा बढ़ रहा है? इन सभी सवालों में कुछ पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन कैंसर की बढ़ती चुनौती को सिर्फ किसी एक कारण से समझना सही नहीं होगा।
SSO कैंसर हॉस्पिटल के संस्थापक और लीड सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कैवल गुंडावडा के अनुसार, कैंसर का बढ़ता बोझ कई बदलावों का संयुक्त परिणाम है। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ती उम्र, बेहतर जांच और बीमारी के प्रति बढ़ती जागरूकता—इन सभी ने तस्वीर को बदल दिया है।
लंबी उम्र के साथ बढ़ा कैंसर का जोखिम
करीब एक सदी पहले संक्रामक बीमारियां और इलाज की सीमित सुविधाएं बड़ी संख्या में लोगों की जान ले लेती थीं। आज टीकाकरण, बेहतर स्वच्छता, एंटीबायोटिक्स और आधुनिक चिकित्सा की वजह से लोग पहले की तुलना में अधिक उम्र तक जीवित रहते हैं।
यह चिकित्सा विज्ञान की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता है। कई कैंसर उम्र से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं से प्रभावित होते हैं। इसलिए लोगों के लंबे समय तक जीवित रहने के साथ कैंसर के मामलों का बढ़ना अपने आप में पूरी कहानी नहीं बताता।
बदली जीवनशैली भी एक अहम कड़ी
पिछले कुछ दशकों में हमारी दिनचर्या तेजी से बदली है। शारीरिक गतिविधि कम हुई है, लंबे समय तक बैठने की आदत बढ़ी है और भोजन में अत्यधिक प्रोसेस्ड चीजों की हिस्सेदारी बढ़ी है। नींद की कमी, मोटापा और मेटाबोलिक समस्याएं भी पहले की तुलना में ज्यादा दिखाई देती हैं।
इनमें से कई कारक शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन और हार्मोनल तथा मेटाबोलिक बदलावों से जुड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि कैंसर की चर्चा अब केवल जेनेटिक्स तक सीमित नहीं रह गई है। व्यक्ति की जीवनशैली और पर्यावरण भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर कैंसर का कारण जीवनशैली है। कैंसर एक जटिल बीमारी है और अलग-अलग प्रकार के कैंसर के जोखिम कारक भी अलग होते हैं।
ज्यादा मामले दिखने का मतलब हमेशा बीमारी का फैलना नहीं
कैंसर के आंकड़ों में बढ़ोतरी को समझते समय एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है—पहले की तुलना में आज कैंसर का पता लगाने की क्षमता बेहतर है।
बेहतर इमेजिंग, पैथोलॉजी, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग, जागरूकता और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों के कारण ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं जो पहले देर से पता चलते थे या बिल्कुल पहचान में नहीं आते थे।
इसलिए कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी का एक हिस्सा बेहतर पहचान का परिणाम भी हो सकता है। खासकर जब बीमारी का पता शुरुआती चरण में चलता है, तो इलाज के विकल्प और परिणाम कई मामलों में बेहतर हो सकते हैं।
सबसे बड़ी समस्या: इलाज में देरी
डॉक्टरों के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि कई मरीज शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग बीमारी के डर से जांच नहीं कराते, जबकि कुछ इंटरनेट पर मौजूद अप्रमाणित जानकारी के आधार पर इलाज में देरी कर देते हैं।
कैंसर में समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर उचित जांच कराना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है।
तकनीक तेजी से आगे बढ़ी, लेकिन जागरूकता?
आज कैंसर के इलाज में प्रिसिजन मेडिसिन, मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग, रोबोटिक सर्जरी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी तकनीकों ने उपचार के विकल्पों को काफी बदल दिया है।
लेकिन चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी समझ भी बढ़ना जरूरी है। कैंसर का मतलब हमेशा मौत नहीं होता। कई प्रकार के कैंसर का समय पर पता लगने पर प्रभावी इलाज संभव है और कुछ मामलों में लंबे समय तक बीमारी को नियंत्रित भी किया जा सकता है।
चुनौती सिर्फ मरीजों की संख्या नहीं
कैंसर के बढ़ते मामलों का दबाव सिर्फ अस्पतालों पर नहीं पड़ता। एक मरीज की देखभाल में विशेषज्ञ डॉक्टर, पैथोलॉजी, इमेजिंग, सर्जरी, दवाएं, रिहैबिलिटेशन, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और लंबे समय तक फॉलो-अप जैसी कई सेवाएं शामिल हो सकती हैं।
इसलिए आने वाले समय में चुनौती केवल नए इलाज विकसित करने की नहीं होगी। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों तक समय पर सही विशेषज्ञता और उपचार पहुंच सके।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि कैंसर क्यों बढ़ रहा है
कैंसर के बढ़ते मामलों को देखकर केवल यह पूछना कि “कैंसर क्यों बढ़ रहा है?” शायद पर्याप्त नहीं है।
एक ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब कैंसर की जांच और इलाज की तकनीक लगातार बेहतर हो रही है, तब भी इतने मरीज बीमारी की गंभीर अवस्था में अस्पताल क्यों पहुंचते हैं?
कैंसर से लड़ाई में रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली, जोखिम कारकों की समझ और समय पर जांच जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही जरूरी है कि बीमारी के संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए।
आधुनिक ऑन्कोलॉजी ने कैंसर के इलाज की संभावनाओं को काफी बदला है। अब जरूरत इस बात की है कि इन प्रगति का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक समय पर पहुंचे।








