नई दिल्ली। गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने गन्ने की लागत, किसानों को मिलने वाले भुगतान और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति का अध्ययन करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
समिति यह भी जांच करेगी कि चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत में बदलाव की जरूरत है या नहीं। इसके लिए उत्पादन लागत, बाजार में चीनी के मौजूदा दाम, गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में हुई बढ़ोतरी और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जाएगा।
महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों पर भी फोकस
खाद्य मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, समिति महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों की समस्याओं के साथ-साथ चीनी उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करेगी। सरकार का यह फैसला 12 अक्टूबर को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ गन्ना किसान प्रतिनिधियों की बैठक के बाद सामने आया है।
समिति में कृषि आयुक्त, संयुक्त सचिव (चीनी), संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) और निदेशक (चीनी) को सदस्य बनाया गया है। समिति जरूरत के अनुसार किसानों, चीनी मिलों, राज्य सरकारों, संबंधित मंत्रालयों, शोध संस्थानों और विशेषज्ञों से चर्चा करेगी।
गन्ने की लागत के हिसाब से दाम पर सुझाव
समिति गन्ने की खेती में आने वाली लागत और किसानों के अन्य कृषि खर्चों का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर किसानों को बेहतर और उचित मूल्य दिलाने के उपाय सुझाए जाएंगे। साथ ही चीनी मिलों की उस मांग पर भी विचार होगा, जिसमें न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाने की बात कही जा रही है।
चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत में आखिरी बड़ा बदलाव 2018-19 के चीनी सीजन में हुआ था। इसके बाद गन्ने के FRP में कई बार बढ़ोतरी हुई, लेकिन चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत में संशोधन नहीं किया गया। ऐसे में अब समिति इस अंतर का भी आकलन करेगी।
गन्ने की तौल में गड़बड़ी पर भी नजर
किसानों के गन्ने की तौल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी समिति के एजेंडे में शामिल है। समिति चीनी मिलों में गन्ने की जांच और वजन दर्ज करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी, ताकि किसानों को उनकी वास्तविक उपज के हिसाब से भुगतान मिल सके।
मशीन से गन्ने की कटाई के दौरान किसानों के भुगतान में होने वाली संभावित कटौती की भी जांच की जाएगी। समिति यह पता लगाएगी कि मशीन से कटाई के बाद गन्ने के वजन में कितनी कमी आती है और इसका किसानों की आमदनी पर क्या असर पड़ता है।
समयसीमा तय नहीं, जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट
सरकार ने समिति की रिपोर्ट के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की है। हालांकि, आदेश में समिति से कहा गया है कि वह अपनी जांच पूरी कर निष्कर्ष और कार्रवाई योग्य सुझाव जल्द से जल्द सक्षम प्राधिकारी के सामने रखे।
सरकार की इस पहल से एक ओर किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलाने की नीति पर मंथन होगा, वहीं दूसरी ओर चीनी मिलों की आर्थिक सेहत को मजबूत करने के लिए भी संभावित बदलावों का रास्ता साफ हो सकता है।









