नई दिल्ली। संसद के संभावित विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की चर्चा है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार इसी महीने विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। इस दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर आगे की रणनीति बनाई जा सकती है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन हासिल करने के लिए अपने सहयोगी दलों और कुछ छोटे विपक्षी दलों से बातचीत कर रही है। विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक संसदीय समर्थन जुटाना सरकार के सामने अहम चुनौती है। विपक्षी दलों के साथ सहमति बनाने की कोशिशों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर मतभेद
परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सरकार तथा विपक्ष के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। कांग्रेस ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने का प्रस्ताव रखा था।
इन मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा है। ऐसे में संभावित विशेष सत्र के दौरान विधेयकों को लेकर क्या रणनीति अपनाई जाती है, इस पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
पहले भी पारित नहीं हो सका था विधेयक
संसद के बजट सत्र के दौरान परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी समर्थन नहीं मिल सका था। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मतदान में 528 सांसदों ने हिस्सा लिया था। इनमें 298 ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया था।
संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। इस वजह से विधेयक पारित नहीं हो सका।
अब संभावित विशेष सत्र की चर्चा के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार विपक्षी दलों के साथ सहमति बनाने में कितनी सफल होती है और महिला आरक्षण तथा परिसीमन के मुद्दे पर आगे क्या फैसला लिया जाता है।
नोट: विशेष सत्र की तारीख और एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि होने तक इसे संभावित घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।









