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किसानों को 3508 रुपये में मिले धान का दाम, फसल नुकसान का मुआवजा भी दे सरकार: AAP

रायपुर । 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने वाली है, लेकिन अब तक अनेक किसानों का पंजीयन और गिरदावरी संबंधी काम पूरा नहीं हो पाया है। आम आदमी पार्टी के नेताओं मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय, प्रदेश प्रवक्ता जयदीप खनूजा,प्रदेश अध्यक्ष किसान विंग तारेंद्र चंद्राकर, प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी और कार्यकारी जिलाध्यक्ष रायपुर सागर क्षीरसागर ने आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ऐसे समय में जब किसानों को अपनी उपज बेचने की तैयारी करनी चाहिए, उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं और तकनीकी समस्याओं के कारण परेशान होना पड़ रहा है। विभिन्न जिलों से सामने आ रही खबरों के अनुसार, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और राजस्व संबंधी कार्यों में देरी के कारण किसानों के सामने धान खरीदी को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है।

आम आदमी पार्टी की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

1. केंद्र सरकार द्वारा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 2024-25 में 117 रूपये,2025-26 में 69 रूपये और 2026-27 में 72 रूपये कुल मिलाकर 258 रूपये की वृद्धि की है जिसे समर्थन मूल्य में जोड़कर दिया जाये। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की कांग्रेस सरकार की 150 रूपये प्रति क्विंटल की किस्त बाकी है उसे भी इस बढ़ी हुई राशि को यदि राज्य सरकार के वर्तमान 3,100 रूपये के मूल्य में जोड़ा जाए, तो किसानों को प्रति क्विंटल 3,508 रूपये की राशि मिलनी चाहिए।
2. आकस्मिक बारिश से प्रदेश में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है जिसका उचित मुआवजा किसानों को मिलना चाहिए।

3. पटवारी हड़ताल के दौरान रकबा संशोधन एवं संवेदनशीलता: वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा ऐप के माध्यम से किसानों का रकबा संशोधन व रकबा समर्पण किया जा रहा है। चूंकि अभी पटवारी हड़ताल पर हैं, इसलिए तकनीकी व व्यावहारिक त्रुटियों की भारी संभावना है। विदित हो कि पिछले वर्ष धान खरीदी के दौरान रकबा संशोधन और रकबा समर्पण की विसंगतियों को लेकर कुछ किसानों ने हताश होकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। वैसी अप्रिय परिस्थिति इस वर्ष निर्मित नहीं होनी चाहिए। अतः मांग है कि रकबा संशोधन का कार्य अत्यंत सावधानी पूर्वक और पूर्णतः किसान की सहमति से ही किया जाए। बिना किसान की स्पष्ट सहमति के किसी भी खाते के रकबे में कोई छेड़छाड़ न की जाए। यदि इस वर्ष रकबा संशोधन या समर्पण की त्रुटियों के कारण कोई भी किसान आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होता है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

4. बायोमेट्रिक (अंगूठा निशान) अनिवार्यता को निरस्त करने बाबत: वर्तमान धान खरीदी में किसानों के लिए बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान) को अनिवार्य किया गया है। सर्वर की समस्या, नेटवर्क की कमी और बुजुर्ग किसानों के फिंगरप्रिंट मैच न होने के कारण इससे खरीदी में भारी दिक्कत आ रही है। अतः इस अनिवार्य नियम को तत्काल कैंसिल कर पूर्व की व्यवस्था (बिना अनिवार्य बायोमेट्रिक) को ही बहाल रखा जाए।

आम आदमी पार्टी सरकार को आगाह करती है कि यदि सरकार ने पटवारियों और किसानों की समस्याओं और समर्थन मूल्य 3508 प्रति क्विंटल राशि का भुगतान नहीं किया जाये और वर्तमान में जारी आकस्मिक बारिश से फसल नुकसान का मुआवजा नहीं दिया गया तो पार्टी जल्द ही प्रदेश में किसानों के समर्थन में पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन करेगी।

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