हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शाम के समय महादेव की पूजा करने से सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
नवंबर 2026 में दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे। पहला 6 नवंबर को और दूसरा 22 नवंबर को रखा जाएगा। आइए जानते हैं दोनों व्रतों की तारीख और पूजा का शुभ समय।
नवंबर 2026 में प्रदोष व्रत की तारीख
1. शुक्र प्रदोष व्रत (6 नवंबर 2026)
- दिन: शुक्रवार
- त्रयोदशी तिथि शुरू: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
- पूजा मुहूर्त: शाम 5:05 से 7:40 बजे तक
2. रवि प्रदोष व्रत (22 नवंबर 2026)
- दिन: रविवार
- त्रयोदशी तिथि शुरू: 22 नवंबर, सुबह 4:56 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 23 नवंबर, रात 2:36 बजे
- पूजा मुहूर्त: शाम 4:59 से 7:37 बजे तक
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। इसके बाद बेलपत्र, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें तथा शिव मंत्रों का जाप करें। अंत में प्रदोष व्रत की कथा पढ़कर आरती करें।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन व्रत और उपासना करने से जीवन की परेशानियां दूर होने तथा परिवार में खुशहाली आने की मान्यता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है।









