नई दिल्ली। भारत में एक संभावित ‘सुपर अल नीनो’ को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर सुपर अल नीनो की स्थिति बनती है, तो अगले छह महीनों में भारत में अत्यधिक गर्मी के कारण करीब 15,800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़ा एक मॉडल आधारित अनुमान है, न कि निश्चित भविष्यवाणी। रिपोर्ट की पूरी कार्यप्रणाली का अभी पीयर रिव्यू होना बाकी है।
कैसे तैयार किया गया मौतों का अनुमान?
रिपोर्ट की सह-लेखक और रोडियम ग्रुप की क्लाइमेट एवं एनर्जी प्रैक्टिस की डायरेक्टर एमिली ग्रोवर-कोपेक के मुताबिक, अनुमान दो प्रमुख चीजों पर आधारित है—
- मौसम के मौसमी तापमान का पूर्वानुमान
- तापमान बढ़ने और मृत्यु दर के बीच स्थापित संबंध
इसके लिए यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) SEAS5 के मौसमी पूर्वानुमान का इस्तेमाल किया गया। ग्रोवर-कोपेक के अनुसार, कई उपलब्ध मौसमी पूर्वानुमानों की तुलना में ECMWF SEAS का अनुमान बीच की स्थिति में आता है, यानी इसे औसत या मध्यम परिदृश्य के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
इसके साथ ही तापमान और मृत्यु दर के बीच संबंधों से जुड़े पहले प्रकाशित शोध का भी इस्तेमाल किया गया।
1996 से 2025 तक के आंकड़े क्यों?
रिपोर्ट में 1996-2025 की 30 साल की अवधि को बेसलाइन बनाया गया है। रिपोर्ट की सह-लेखक के मुताबिक, जलवायु विज्ञान में 30 साल की बेसलाइन अवधि का इस्तेमाल आम है और यह मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में योजना बनाने के लिए उपयोगी मानी जाती है।
इस अनुमान का उद्देश्य संभावित गर्मी के प्रभावों को पहले से समझना और स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य संसाधनों की तैयारी में मदद करना है।
दुनिया के औसत तापमान पर भी असर
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले महीनों में सुपर अल नीनो वैश्विक स्तर पर जमीन के औसत तापमान को सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक अधिक कर सकता है। रिपोर्ट इस तापमान वृद्धि की तुलना जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में संभावित तापमान बढ़ोतरी से करती है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
भारत में NRDC की क्लाइमेट रेजिलिएंस एंड हेल्थ टीम के प्रमुख अभियांत तिवारी ने इसे एक उपयोगी शुरुआती चेतावनी बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि मौतों से जुड़े अनुमानों को सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि अध्ययन की पूरी कार्यप्रणाली का अभी पीयर रिव्यू होना बाकी है।
वहीं, AIIMS के सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने गर्मी से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कम करने के लिए तेजी से कदम उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने हर स्तर पर हीट एक्शन प्लान लागू करने, डेटा आधारित नीतियां बनाने और राष्ट्रीय तथा स्थानीय स्तर पर डेटा साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के दौरान बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, पहले से बीमार लोगों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों जैसे संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
यानी, सुपर अल नीनो को लेकर सामने आया 15,800 मौतों का आंकड़ा एक अनुमान है, लेकिन यह संभावित गर्मी के स्वास्थ्य प्रभावों से निपटने के लिए समय रहते तैयारी की जरूरत की ओर जरूर इशारा करता है।








