तिब्बत से बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं, 910 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 290 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे बालेन शाह
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार को बाढ़ प्रभावित नुवाकोट समेत अन्य क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों, सुरक्षाकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 13,295 जवान खोज एवं बचाव अभियान में जुटे हैं। इनमें नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाली सेना के 4,200 और सशस्त्र पुलिस बल के 1,845 जवान शामिल हैं।
बालेन शाह ने कहा कि स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और सरकारी तंत्र पूरी क्षमता के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटा है। सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की जान बचाना, लापता लोगों की तलाश, घायलों का इलाज और प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाना है।
रसुवा में सबसे ज्यादा तबाही
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव नेपाल के रसुवा जिले में पड़ा है। बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण रसुवा तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह तबाह हो गया है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर के जरिए राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
भूस्खलन के कारण हेलीकॉप्टरों के उतरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है, जिससे राहत-बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
573 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार, सरकार युद्ध स्तर पर खोज एवं राहत-बचाव अभियान चला रही है। गुरुवार को 69 हवाई उड़ानों के जरिए 573 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।
निजी हेलीकॉप्टरों को भी कमांड और कोऑर्डिनेशन सिस्टम के तहत राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों और विशेष रूप से नदियों की ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है।
नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मुश्किल समय में मदद की अपील की है।
अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया
बाढ़ के बाद नेपाल में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर को सक्रिय कर दिया गया है। बीर अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, टीचिंग अस्पताल, सिविल अस्पताल, पाटन अस्पताल और पुलिस अस्पताल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में 100-100 इमरजेंसी बेड तैयार किए गए हैं, जबकि पाटन अस्पताल में 60 इमरजेंसी बेड की व्यवस्था की गई है। प्रभावित लोगों के इलाज और संभावित स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है।







