UP News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में किशोरी की मौत पर मचे सियासी घमासान के बीच कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी ही सरकार को घेर लिया। राजभर ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को हमला करने के चक्कर में बातों-बातों में अपनी ही सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में हो रही आपराधिक घटनाओं की फेहरिस्त गिना दी। उन्होंने अखिलेश यादव को सेलेक्टिव राजनीति छोड़ने की बात कहते हुुए बेटी की मौत पर राजनीति न करने की नसीहत भी दी। अखिलेश यादव ने 29 अप्रैल को गाजीपुर जाने और लड़की के परिजनों से मिलने की बात कही है। सपा प्रतिनिधिमंडल के दौरे के यहां यहां बवाल हो गया था। इसे लेकर अखिलेश यादव आक्रोशित भी हैं।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा प्रमुख केवल गाजीपुर जैसे मामलों में ही सक्रिय होते हैं, जहां उन्हें राजनीतिक रोटियां सेंकने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अन्य जगहों पर भी गंभीर घटनाएं हो रही हैं, जहां अखिलेश नहीं जाते।
इसी दौरान राजभर ने अपनी ही सरकार के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “बाराबंकी में एक राजभर की दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है, वहां अखिलेश नहीं जाते। देवरिया में राजकुमार चौहान को गोली मार दी जाती है, तब भी वे वहां नहीं जाते। कौशांबी में पाल समाज की बेटी के साथ दुष्कर्म और हत्या होती है, वहां भी वे चुप्पी साध लेते हैं।” राजनीतिक हलकों में राजभर के इस बयान को इस तरह देखा जा रहा है कि अखिलेश को आइना दिखाते-दिखाते वे यह भी स्वीकार कर गए कि वर्तमान भाजपा सरकार के राज में भी हत्या और दुष्कर्म जैसी गंभीर वारदातें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही हैं।
राजभर ने गाजीपुर के कटारिया गांव में पथराव और बवाल की घटना के लिए सीधे तौर पर सपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सपा प्रतिनिधिमंडल को केवल 15 लोगों की अनुमति दी थी, लेकिन वहां 250 से ज्यादा लोग पहुंच गए और अराजकता फैलाने लगे। उन्होंने कहा कि एक बेटी की मौत पर राजनीति करना निंदनीय है। राजभर के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट स्पष्ट कर रही है कि किशोरी ने गंगा में कूदकर अपनी जान दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव ‘खाता न बही, जो वो कहें वही सही’ वाली नीति पर चल रहे हैं।
सपा के शासनकाल पर हमला बोलते हुए राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार में 1000 से ज्यादा दंगे हुए और मुजफ्फरनगर जल रहा था, लेकिन उस समय मुख्यमंत्री सैफई में कार्यक्रमों में व्यस्त थे। उन्होंने नसीहत दी कि गाजीपुर के लोग अमन-चैन चाहते हैं और पीड़ित परिवार ने खुद राजनीति न करने की अपील की है, इसलिए अखिलेश यादव को लखनऊ में बैठकर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए।
राजभर ने अंत में दोहराया कि योगी सरकार ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये, जमीन और आवास देकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है, जबकि विपक्ष केवल टकराव पैदा करने की कोशिश कर रहा है।









