नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में गए राज्यसभा सांसद ने अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर पंजाब सरकार से अपने खिलाफ दर्ज कथिक एफआईआर की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर दी. इस मामले के बाद पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है.
याचिका में संदीप पाठक ने कहा है कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ गैर-सरकारी सूत्रों से जानकारी मिली कि पंजाब पुलिस ने अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं. हालांकि कई बार संपर्क करने के बावजूद पुलिस की तरफ से उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
संदीप पाठक ने अदालत से मांग की है कि जब तक मामला विचाराधीन है, तब तक पंजाब सरकार को किसी तरह की कार्रवाई या गिरफ्तारी से रोका जाए. साथ ही, उन्होंने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि पंजाब पुलिस को निर्देश दिया जाए कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर नंबर, तारीख, संबंधित थाना और जिला जैसी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराने कराए.
नियमों के अनुसार नहीं
याचिका में यह भी कहा गया है कि पंजाब सरकार हलफनामा दाखिल कर बताए कि भाजपा में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ कौन-कौन से मामले दर्ज किए गए हैं? उनका यह भी आरोप है कि एफआईआर से जुड़ी जानकारी पंजाब पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं की गई, जबकि नियमों के मुताबिक ऐसा करना जरूरी होता है.
आम आदमी पार्टी ने नहीं दिया रिएक्शन
मामला दर्ज होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. विपक्षी दल इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है.
हाईकोर्ट जवाब मांग सकता है
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है, तो उसकी बेसिक जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध होना जरूरी है. ऐसे में हाईकोर्ट अब पंजाब सरकार और पुलिस से इस मामले में जवाब मांग सकता है.









