पश्चिम बंगाल में इस बार कई ऐसे कारनामे हुए जो अप्रत्याशित रहे। कुछ हजार से लेकर करोड़ों की संपत्ति रखने वाले लोगों ने इस चुनाव में अपना हाथ आजमाया। इसी राज्य से ऐसी महिला विधायक बनकर आई है जो दूसरों के घर जाकर काम करती थी।
कलिता माझी ने बंगाल में मिसाल पेश की है। एक छोटे से घर में रहने वाली, दूसरों के घर में काम करके आजीविका चलाने वाली कलिता ने टीएमसी कैंडिडेट को तकरीबन साढ़े बारह हजार वोटों से हरा दिया। ये किसी इतिहास से कम नहीं है।
कलिका माझी ने बंगाल चुनाव में वो कर दिखाया है जो बेहद फिल्मी लगता है। माझी दो घरों में बर्तन धुलने का काम करती हैं। यहां से उनको कुछ हजार रुपये की आमदनी होती है। कलिता माझी को 107692 वोट मिले जबकि श्यामा प्रसन्न को 95157 ही वोट मिल पाए। इस तरह कलिता 12,535 वोटों से जीत गईं।
कलिता की जीत पर भाजपा सांसद पी. सी. मोहन ने कहा, “बीजेपी बंगाल की उम्मीदवार कलिता माझी, जो 4 घरों में घरेलू कामगार के तौर पर काम करती हैं और महीने के ₹2,500 कमाती हैं, ने औसग्राम निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है। यही बीजेपी की ताकत है, जहां एक आम नागरिक भी आगे बढ़ सकता है और एक सचमुच प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है।”
औसग्राम की सीट पर लंबे समय से पारंपरिक राजनीतिक असर रहा है। कलिता माझी की जीत ने बताया कि अब जनता बदलाव चाह रही है। कलिता माझी कोई पहली बार चुनाव नहीं लड़ रही हैं। पिछली बार भी विधानसभा चुनाव में कलिता माझी मैदान में थीं। उन्होंने टीएमसी के अबेदानंद से 12 वोटों से हार गईं थीं। कलिता माझी माझपुकुर की रहने वाली हैं। उनके पति सुब्रत माझी हैं और वह प्लंबर का काम करते हैं।
माझी ने अपने वादों के बारे में बताते हुए कहा कि, मेरे परिवार और आसपास के लोगों को भरोसा था कि इस बार मेरी जीत होगी। माझी ने कहा कि हमारे इलाके में कई समस्याएं हैं। सड़कें, पीने का पानी, हमारे घर, इनका निदान बेहद जरूरी है। माझी ने भरोसा दिलाते हुए कहा था कि अगर वो विजयी होती हैं तो आम लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा और वो केंद्र सरकार की योजनाओं को भी लागू करवाऊंगी। अब उनके जीत जाने के बाद लोग इलाके के विकास के लिए उत्सुक हैं।









